Description
यह पुस्तक जैन धर्म के विविध पहलुओं का संपूर्ण और सम्यक् विवेचन प्रस्तुत करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जैनधर्म-दर्शन के महत्वपूर्ण स्थान को रेखांकित करते हुए यह पुस्तक उस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास है।
पुस्तक में 40 अध्यायों के माध्यम से 275 पृष्ठों में जैनधर्म की परिभाषा, सामान्य परिचय, प्रमुख विशेषताएं, विभिन्न समुदाय, जैन कला-स्थापत्य, तीर्थस्थल, महापुरुष और विचारकों के योगदान को सुव्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है। श्वेतांबर और दिगंबर शाखाओं का विवेचन, जैन रामायण, धर्मस्थल और प्राचीन परंपराओं की विस्तृत चर्चा पुस्तक को समृद्ध बनाती है।
यह पुस्तक केवल सैद्धांतिक नहीं है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में जैनधर्म की प्रासंगिकता को भी प्रदर्शित करती है। ध्यान-योग, अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण, निःशस्त्रीकरण, विश्वशांति, नारी शिक्षा और सामाजिक समस्याओं के समाधान में जैनधर्म की भूमिका को गहनता से उजागर किया गया है।
आधुनिक संदर्भ में स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में जैन सिद्धांतों की उपयोगिता, समाधि-सल्लेखना की महत्ता और समसामयिक समस्याओं का जैन दृष्टि से समाधान इस पुस्तक को विशिष्ट बनाता है। सरल भाषा और तार्किक प्रस्तुतीकरण के साथ यह पुस्तक जैन समाज के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और दर्शन में रुचि रखने वाले सभी जिज्ञासुओं के लिए एक अमूल्य संदर्भ ग्रंथ है।





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