Description
इस संग्रह की रचयिता, डॉ. दिव्या, एक अनुभवी मनोवैज्ञानिक हैं, जो पिछले सोलह वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श एवं चिकित्सा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। भावनाओं को समझना और उन्हें आत्मा की गहराई से सुनना उनका पेशा ही नहीं, उनका स्वभाव भी है। डॉ. दिव्या ने भाषा को सहज और सरल रखने का प्रयास किया है, ताकि यह संग्रह अधिक से अधिक पाठकों से जुड़ सके। उनका मानना है कि भावनाएँ स्त्री और पुरुष में भेद नहीं करतीं, पर उनकी अभिव्यक्ति के स्वरूप भिन्न हो सकते हैं। इस संग्रह में स्त्री-मन को केंद्र में रखा गया है—क्योंकि इसमें निहित अनेक अनुभूतियाँ लेखिका की अपनी जीवन-यात्रा का अंश हैं। संग्रह का भावानुसार विभाजन ‘नवरस’ के आधार पर किया गया है, परंतु किस कविता में कौन-सा भाव प्रमुखता से उभर कर आता है—इस निर्णय का अधिकार उन्होंने अपने पाठकों को सौंपा है।





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