Description
श्री चितरंजन पन्त का जन्म 30 अप्रैल 1966 को ग्राम पाली थर्प, जिला पिथौरागढ़ में श्री हरीश चंद्र पंत एवं मुन्नी देवी के घर में हुआ, उन्होंने अपनी आरंभिक विद्यालयी शिक्षा जिला पिथौरागढ़ के ही विभिन्न विद्यालयों में प्राप्त की, तत्पश्चात उन्होंने अपना स्नातक (Zoology, Botany, Chemistry), परस्नातक (Botany) एवं बी.एड. अल्मोड़ा से किया, जहां पर वह अपनी बुआ के घर में रहे, इसी दौरान उन्होंने आकाशवाणी में अनाउंसर के रूप में भी कार्य किया एवं बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाए। शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने अध्यापक के रूप में अपना कार्यकाल GIC कारकीनगर से 28 सितंबर 1992 को शुरू किया, उसके बाद कई जगहों पर बायोलॉजी के प्रवक्ता के रूप में अपनी सेवा देने के बाद दिनांक 31 जनवरी 2025 को वह अपनी सेवा से निवृत हुए। पन्त जी अपने आप में शील, गंभीर और बुद्धिजीवी पुरुष हैं, जिनके मार्गदर्शन के कई लोग कायल हैं, वर्तमान में पंत जी हल्द्वानी में अपने निवास प्रतिभा कुटीर में रहते हैं। प्रतिभा जी के शारीरिक रूप से चले जाने के पश्चात् उन्होंने ही इस भवन का नामकरण किया है एवं इस किताब को अत्यंत भावनात्माक शैली में लिखा है, जो प्रतिभा जी से संबंधित सभी मुख्य स्मृतियों का वर्णन अति सुंदर रूप से करती हैं। पंत जी की यह अनुपम भेंट है प्रतिभा जी के लिए।





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