Description
ABOUT THE BOOK :
पर्यावरण इस सृष्टि का मूल जीवन तत्व है। इसकी समृद्धि संसार की समृद्धि है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी तत्व, चर-अचर एवं जीव-जन्तु पर्यावरण का ही द्योतक हैं। पर्यावरण शब्द ‘परि’ एवं ‘आवरण’ से मिलकर बना है। ‘परि’ का तात्पर्य है चारों ओर और ‘आवरण’ का अर्थ है घेरा। अर्थात पृथ्वी के चारों तरफ के घेरे को पर्यावरण कहते हैं। पर्यावरण शब्द समस्त परिस्थितियों को समर्पित है जो जीवों के जीवन को प्रभावित करती हैं। पर्यावरण का तात्पर्य उस परिवेश से होता है जो जीवमण्डल को चारों तरफ से घेरे हुए रहता है। मानव वायुमण्डल, स्थलमण्डल तथा जलमण्डल के भौतिक, रासायनिक एवं सभी तत्वों को सम्मिलित किया जाता है।
ABOUT THE AUTHOR :
डॉ. दया शंकर त्रिपाठी की प्राथमिक शिक्षा: सेंट्रल हिन्दू (ब्वायज) स्कूल, कमच्छा, वाराणसी (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से सम्बद्ध) और उच्च शिक्षा: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से विज्ञान में बी.एससी. (1978), एम.एससी. (1981) तथा पीएच.डी. (1988), डिप्लोमा इन योग (1990), योग साधना केन्द्र, मालवीय भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से हुई। साथ ही उन्हें शोध अनुभव: 16 वर्ष से अधिक और शिक्षण अनुभव: 20 वर्ष से अधिक है।
शोध उपलब्धियाँ
अनुसंधान काल के अन्तर्गत एक नई सब्जी प्रजाति ‘सोलनम मैक्रोकापोन’ को प्रथम बार भारत (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) में उत्पादित (Introduced) कर रेडिएशन का प्रभाव और रेडियोप्रोटेक्शन पर अनुसंधान कार्य किया। साथ ही, सोलनम वंश के लगभग दस जातियों/प्रजातियों पर भी अनुसंधान कार्य किया।
भोपाल गैस दुर्घटना, जिसमें मिथाइल आइसोसाइनेट नाम की जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, वहाँ के आसपास की वनस्पतियों पर बाह्य तथा आनुवांशिक प्रभाव का प्रथम बार अध्ययन किया, जिसकी राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हुई। अनुसंधान कार्य अनेक शोध पत्रों तथा पुस्तकों में संदर्भित किये गये हैं। अनेक विद्वत व सामाजिक संगठनों तथा समितियों के सदस्य हैं। सामाजिक कार्यों में सक्रिय।
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