Description
प्रस्तुत ग्रन्थ शान्तिदेव प्रणीत प्रज्ञापारमिता एवं गौडपादकारिका का एक गम्भीर तुलनात्मक दार्शनिक अध्ययन है। इसमें बौद्ध शून्यवाद तथा अद्वैत वेदान्त के तत्त्वमीमांसीय, ज्ञानमीमांसीय तथा अन्य विविध पक्षों का विश्लेषण किया गया है। शान्तिदेव द्वारा प्रतिपादित सत्यद्वय, प्रमाण, प्रमेय, चैतन्य तथा निषेधात्मक तत्त्वदृष्टि की तुलना गौडपाद के विधेयात्मक अद्वैत से की गयी है। यह ग्रन्थ स्पष्ट करता है कि दोनों परम्पराएँ जगत् की मिथ्यात्व व्याख्या में साम्य रखते हुए भी तत्त्वस्वीकार की दृष्टि से किस प्रकार भिन्न प्रतीत होती हैं। यह कृति शून्यवाद तथा अद्वैत वेदान्त के तुलनात्मक अध्ययन के साथ- साथ गौडपाद पर लगने वाले प्रछन्न बौद्ध सम्बन्धी आरोपों का विवेचन भी प्रस्तुत करती है।





Reviews
There are no reviews yet.